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रणा.. पुलवामा हमले के बाद युवाओं में बढ़ा आर्मी में जाने का जुनून
उज्जैन:पुलवामा आतंकी हमले में सेना के 40 से अधिक जवान शहीद हुए। इस आतंकी हमले के बाद देशभर में गुस्सा है तो युवाओं में आक्रोश के साथ पाकिस्तान से बदला लेने की भावना बलवती हो रही है। आर्मी में भर्ती होने के लिये युवा ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट पर सुबह-शाम पसीना बहा रहे हैं। आर्मी में भर्ती होकर दुश्मन देश को सबक सिखाने के लिये किसी ने अपने इकलौते पुत्र को भेजा है तो किसी के माता पिता ने बदला लेने की कसम अपने बेटे को दिलाई है। विक्रम यूनिवर्सिटी खेल मैदान पर सुबह 5 बजे से आर्मी भर्ती की ट्रेनिंग लेने पहुंचे युवाओं ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद किसी प्रकार के डर, माता-पिता की रोकटोक या जोश में कमी के प्रश्रों पर देशभक्ति में डूबे हैरान करने वाले जवाब दिये।
पुलवामा आतंकी हमले के बाद सेना में भर्ती होने के लिये ट्रेनिंग सेंटर पर युवाओं की संख्या बढ़ी है। जो युवक वर्तमान में ट्रेनिंग ले रहे हैं उनमें या उनके परिजनों में किसी प्रकार का भय नहीं है। सेंटर के कोच भी युवाओं का मनोबल बढ़ाते हैं और उन्हें देशसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
लोकेंद्रसिंह चौहान, कोच
पुलवामा में आतंकियों ने कायरतापूर्ण हमला किया है। इस हमले के बाद सेना में जल्द भर्ती होकर दुश्मनों से बदला लेने की भावना और बढ़ गई है। पिछले 3 महीने से आर्मी भर्ती की ट्रेनिंग ले रहा हूं और मन में किसी प्रकार का भय नहीं।
– अंकित शर्मा, भीलवाड़ा
सिंधी कालोनी में किराये का मकान लेकर आर्मी भर्ती की ट्रेनिंग ले रहा हूं। 12वीं तक पढ़ाई के बाद सेना में जाने का मन बनाया और पुलवामा हमले के बाद पिता ने कहा सेना में भर्ती होकर दुश्मनों से बदला लेना।
– महेंद्रसिंह चंद्रावत, शाजापुर
सेना भर्ती में शारीरिक परीक्षा पास करने के बाद लिखित परीक्षा में फेल हो गया था इसलिये दोबारा तैयारी कर रहा हूं। पिता ड्राइवर हैं और मैं इकलौता पुत्र हूं। पुलवासा हमले का बदला लेना ही मेरा मकसद है।
– विनोद झाला, नगरकोट
पिता ड्रायवर हैं, परिवार में सबसे छोटा हूं लेकिन बचपन से सेना में जाने की मन में ठानी थी। युद्ध या आतंकी हमलों से डर नहीं लगता, खून खौलता है। परिजन पुलवामा जैसे आतंकी हमलों से नहीं डरते बल्कि मेरा हौसला बढ़ाते हैं।